Friday, October 10, 2014

Computer Science Subjects: तोड़ कर दिल वो चले गये एक खिलौना समझकर हम तो राह तक...

Computer Science Subjects: तोड़ कर दिल वो चले गये एक खिलौना समझकर हम तो राह तक...: तोड़ कर दिल वो चले गये एक खिलौना समझकर  हम तो राह तकते रहे दीवानों की तरहा की इक बार देखेंगे मुझे पलट कर वो  की जिन्दगी गुजार लेंगे तेरे ...

Computer Science Subjects: कुछ हौसले टूट रहे है उनकी निगाहों को देख कर कुछ ख्...

Computer Science Subjects: कुछ हौसले टूट रहे है उनकी निगाहों को देख कर कुछ ख्...: कुछ हौसले टूट रहे है उनकी निगाहों को देख कर  कुछ ख्व्वाब मेरे टूट गये सिसकती आँखों को देखकर  कुछ हम टूट से गये वो कापती बाहों को देखकर  क...

Saturday, September 20, 2014

Computer Science Subjects: कतरा कतरा बह के सब थम जायेगा

Computer Science Subjects: कतरा कतरा बह के सब थम जायेगा: आज रोने दे रह रहके मुझे  थोडा और कयामत को पास आने दे   देखते  है हम भी इस समंदर को  रह रह के बिजलिया गिराने दे  बस और बस कुछ और लम्ह...

Computer Science Subjects: जीते जी हर पल मै मरता हु

Computer Science Subjects: जीते जी हर पल मै मरता हु: कभी कभी पूछता हु खुदा से ये दिल बनाया क्यों तुमने  दिल ही बनाया क्यों दर्द को बनाया था  दर्द ही देना था जो दिल में तुमको  तो मुहब्बत क...

Computer Science Subjects: सिसक कर आंसू क्यों आ जाते है

Computer Science Subjects: सिसक कर आंसू क्यों आ जाते है: माथे पे हाथ रखकर हम बैठे है  उंगलियों से आँखों को सहलाते है  सिहरन जब होती है थोड़ी सी मुझे  सिसक कर आंसू क्यों आ जाते है  आह भरता हु उ...

Computer Science Subjects: कुसूरवार हु मै तो सजा मुकम्मल करो मेरी गुनाह क़ुबू...

Computer Science Subjects: कुसूरवार हु मै तो सजा मुकम्मल करो मेरी गुनाह क़ुबू...: कुसूरवार हु मै तो सजा मुकम्मल करो मेरी  गुनाह क़ुबूल है मुझे बार बार मै ये कहता हु  क़त्ल करदो मुझे यही खुदा से कहता हु  दिल से कहता हु बस...

Computer Science Subjects: जज़्बात

Computer Science Subjects: जज़्बात: क्यों होता है कभी कभी जब हम जीते हुए भी मरना चाहते है, परिस्थतियो के वसीभूत क्यों होते है, क्यों हम एक तपती आग में जलते रहते है, कुछ हमार...

Thursday, August 7, 2014

चलो ये भी कह दिया तो तुमने ठीक किया

चलो ये भी कह दिया तो तुमने ठीक किया
तुम्हे भरोसा नही है हमपे ये जता ही दिया
उम्र भर थाम कर चलते रहे हम जो डोर 
पल ही में कच्चे धागे की तरहा तोड़ दिया

हर लम्हे को याद करके लिखता हु

हर लम्हे को याद करके लिखता हु 
यादो से बात करके लिखता हु 
कभी बेचैन हो जाता है मेरा दिल तुम बिन 
उसको संभाल के ये लिखता हु 
इसमें स्याही नही है कलम की सनम 
अपने लहू के आफताब से मै लिखता हु 
दर्द होता नही लहू के निकलने में 
उससे ज्यादा दर्द होता है तुमसे बिछड़ने में
वो तो है देवी से बढ़कर किस मंदिर की सोभा है नही
हम पत्थर की पूजा करते क्यों हमको उसकी परवाह नही
अपने लहू से हमको सवार है
अपना पेट काट कर पाला है
आज उसी को हम ठोकर मारते
क्यों हमपर है धिक्कार नही
ममता से भरा उसका आँचल
सारे सपने मेरी खातिर
गर आह निकले गलती से ही
आंसुओ से मन भीग जाए
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही

फिर वही रात याद आ गयी

फिर वही रात याद आ गयी

गुजरा जमाना फिर भी हर बात याद आ गयी

मन में थी हया उसे मुस्किल है बया कर पाना

तुमने दी थी जो सौगात वो याद आ गयी

फिर वही रात याद आ गयी

 

गुजरा जमाना फिर भी हर बात याद आ गयी

अब ये दिन भी है क्या

कल थे हम कहा  और आज है कहा

बदला हर मौसम बदला हर सावन

नही बदला तो ये दिल मेरा

वो मुलाकात याद आ गयी

फिर वही रात याद आ गयी

 

गुजरा जमाना फिर भी हर बात याद आ गयी

लाज से हौले हौले आँखों के झुरमुट को उठाते हुए

की लाख कोशिश उन्हें देखने की फिर भी हिम्मत न हुई

था हर पल का इन्तजार जैसे सदियों सा

वो मिलन की रात याद आ गयी

फिर वही रात याद आ गयी

गुजरा जमाना फिर भी हर बात याद आ गयी

 

जाने कैसी कसमसाहट थी या कसमकस थी मन को मेरे

घूंघट उठा के वो छु ले दिल को मेरे

दीदार् हो  जाये उस लम्हे का मुझे

तुम मुझे मै तुम्हे मै तुम्हे तुम मुझे

देखते ही रहे देखते ही रहे

ये धरा ये गगन ये नदी ये पवन

ठहर जाये जो कुछ पल के लिए

हर लम्हा जो गुजरा था तुम बिन जिन्दगी

आज गिन गिन के उसका हिसाब हो जाये

 

फिर वही रात याद आ गयी

गुजरा जमाना फिर भी हर बात याद आ गयी

 

 

 


Wednesday, August 6, 2014

आज उस ममता की मूरत से क्यों हमको है प्यार नही

वो तो है देवी से बढ़कर किस मंदिर की सोभा है नही
हम पत्थर की पूजा करते क्यों हमको उसकी परवाह नही
अपने लहू से हमको सवार है
अपना पेट काट कर पाला है
आज उसी को हम ठोकर मारते
क्यों हमपर है धिक्कार नही
ममता से भरा उसका आँचल
सारे सपने मेरी खातिर
गर आह निकले गलती से ही
आंसुओ से मन भीग जाए
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही

आज उस ममता की मूरत से क्यों हमको है प्यार नही

वो तो है देवी से बढ़कर किस मंदिर की सोभा है नही
हम पत्थर की पूजा करते क्यों हमको उसकी परवाह नही
अपने लहू से हमको सवार है
अपना पेट काट कर पाला है
आज उसी को हम ठोकर मारते
क्यों हमपर है धिक्कार नही
ममता से भरा उसका आँचल
सारे सपने मेरी खातिर
गर आह निकले गलती से ही
आंसुओ से मन भीग जाए
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही

आज उस ममता की मूरत से क्यों हमको है प्यार नही

वो तो है देवी से बढ़कर किस मंदिर की सोभा है नही
हम पत्थर की पूजा करते क्यों हमको उसकी परवाह नही
अपने लहू से हमको सवार है
अपना पेट काट कर पाला है
आज उसी को हम ठोकर मारते
क्यों हमपर है धिक्कार नही
ममता से भरा उसका आँचल
सारे सपने मेरी खातिर
गर आह निकले गलती से ही
आंसुओ से मन भीग जाए
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही

आज उस ममता की मूरत से क्यों हमको है प्यार नही

वो तो है देवी से बढ़कर किस मंदिर की सोभा है नही
हम पत्थर की पूजा करते क्यों हमको उसकी परवाह नही
अपने लहू से हमको सवार है
अपना पेट काट कर पाला है
आज उसी को हम ठोकर मारते
क्यों हमपर है धिक्कार नही
ममता से भरा उसका आँचल
सारे सपने मेरी खातिर
गर आह निकले गलती से ही
आंसुओ से मन भीग जाए
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही
आज उस ममता की मूरत से
क्यों हमको है प्यार नही

Friday, July 25, 2014

यही जीवन का  सत्य है की मनुष्य के हर कर्म का फल यही मिल जाता है उसके कर्मो के अनुसार किसी को ख़ुशी के रूप में तो किसी को गम के रूप में 
तन्हा होते है हमेशा दूर जब भी होते है तुमसे 
फिर भी जाने कौन साथ रहता है जो मुझसे बात करता है हर पल 
दिखती नही है वो न देख पता मै उसे
फिर भी जाने कैसे उससे मुलाकात होती है हर पल
दूर से यादे बेसब्र करती है हमे 
पास जो होते है तो हमेशा नोक झोक होती है
जिसको बताना था उस तक बात पहुंच गयी
चाहे लब्जो से या फिर दिल के रस्ते से
जानकार भी वो अनजान बनते है कभी कभी 
सायद ये अदा भी नशीली लगती है मुझे उनकी
और क्या हो रहा है वो जब भी मुझसे पूछते है 
हाल ए दिल का कोई पल भी छुपा नही है उनसे
बाते कुछ अटपटी सी लगती है उनकी 
जान कर अनजान बनने की जो आदत हो गयी है
खुद बुलाते है वो महफ़िल में हमे
और बात करने का बहाना ढूंढते रहते है वो 
हम भी इतने हिम्मतवाले नही है 
क्योकि दिल खो दिया है उसी रस्ते में कही
ढूढ़ता है दिल बेचारा कभी ढूढ़ते है हम उसे
सामने रहकर भी मुझको वो दिखाई देता नही
वो कहते है की अपने सारे गम देदो 
और मेरी सारी खुसिया लेलो 
लेकिन क्या वो नही जानते 
की मेरी खुसी भी वोही है
और गम वोही
तुझसे शुरू
तुझसे खत्म
ये जिंदगी का
हर लम्हा
तू साथ है 
तो हर सवेरा मेरा
जो तू नही 
तो क्या है मेरा
वाइफ और पत्नी का सम्बोधन तुम्हे जमाने ने दिया 
इसी बहाने मैंने भी इक नाम तुम्हारा रख दिया
तुम हो साँसे तुम हो बाहे 
मेरे दिन 
और
मेरी राते

संगिनी हो जीवन की मेरे

संगिनी हो जीवन की मेरे

वजूद मेरा ही कहा है 
जब इस गली से गुजरा तो जाना 
पैमाने मोहब्बते के अजमाए नही थे 
लेकिन चले जो आजमाने तो 
अस्तित्वहीन हो गये 
राहो में ढूढ़ने निकले थे कुछ 
और मिल गया वो 
जिसको सोचा नही था कभी
वो वक़्त की बेरहमी थी
जिसके हर पल संग मै सहमी थी
वो आता मेरे पास जब जब
तो इक बेचैनी बढ़ती थी
मुझको उसने ही दूर किया
और हर पल मुझको मजबूर किया
हर लम्हा मुझको डसने लगा
और मुझसे जाने क्या कहने कहा

Thursday, July 24, 2014

सावन घुमड़ घुमड़ बरसे
मेघा ये घम घम घम गरजे
बूंदे भी नृत्य करे छम छम
मन में जैसे प्रेम रस बरसे
नैनो में नसा सा छाने लगा
कोई बेगाना अपना बनाने  लगा
उस बारिश में ऐसे भीगी
जैसे सारी दुनिया लगे फीकी
एक वो है संग मै भी हु
और सारे जहां में कोई नही
इस प्रीत की रीत को कैसे कहे
जैसे प्रेम में हो गयी मै बावरी
लत इत उत डोले
कैसी रुत ये चले
नैनो का दरवज्जा न खोले
ये कुँढि लाज की लग गई
इसको कैसे खोले कैसे खोले
सावन घुमड़ घुमड़ बरसे
मेघा ये घम घम घम गरजे
बूंदे भी नृत्य करे छम छम
मन में जैसे प्रेम रस बरसे  

मेरे प्रियवर मेरे साथी

मेरे प्रियतम ,

समझ नही आता मै क्या कहु तुमसे और क्या लिखू वक़्त जो आपके साथ बिताना था इतनी जल्दी बीत गया और अब जो समय अलग रहकर गुजारना है वो पता नही कैसे बीतेगा ये नही जानते है हम ,हर पल तुम्हारे संग जो गुजरा है वही हर पल अब तुम्हारे बिन गुजरेगा
                    अब मुझे ये एहसास हो रहा है की कभी कभी जिंदगी हमे गुमराह करती रही और हम समझ ही नही पाये। या फिर ये हमारे कर्मो की सजा है। क्या सोचा था हमने और क्या मिला हमे ज्यादा कुछ नही बस थोड़ी सी जिंदगी में उम्र भर का साथ माँगा था पर किस्मत ने हमे यही पर जुड़ा कर दिया आगे का सफर कैसा होगा ये नही जानते हम
अनजाने में ही सही पर न जाने कब आपसे बेइंतहा मुहब्बत कर बैठी  पता ही नही चला लोगो को इस दर्द से गुजरते देखती थी तो मै ये सोचती थी की हमारी जिंदगी में ये क्षण आएगा ही नही लेकिन मेरा भृम टूट गया प्यार कैसा भी हो तकलीफ देता ही है ये ऐसा दर्द जो किसी को दिखा भी नही सकते और नाही कोई इसे कम कर  सकता है सिवाय इसके जिसने ये दर्द दिया है बहुत तकलीफ हो रही है इतना दर्द तो सायद कभी नही हुआ जिंदगी एक बोझ की तरह लग रही है अब ऐसी स्थिति है मेरे सामने की न मई जी सकती हु नाही मै मर सकती हु



मेरे प्रियवर
मेरे साथी
तुम जैसे दिया हो
मैं उसकी बाती
मेरे नैनो का श्रृंगार है तुझसे
ये तेरा आभार है मुझपे
कुछ मेरा भी अधिकार है तुझपे
ये जानकर एक निवेदन है
तुमसे प्यार में अनुमोदन है
मत जाओ मुझसे दूर सखी
मत जाओ मुझसे दूर सखी
तुम बिन  कैसे कटेंगे दिन
सूना सूना मन का उपवन
दिन रेन की सुध न रही सखी
मेरे पल पल लागे कई कई जीवन
कस्तूरी मेरे कुण्डल में
मै फिर भी भटकू इस वन में
आ जाओ मेरे पास सखी
मत जाओ मुझसे दूर सखी
मत जाओ मुझसे दूर सखी
मत जाओ मुझसे दूर सखी

Wednesday, July 16, 2014

उनकी महफ़िल में हम बेगाने हो गए

उनकी महफ़िल में हम बेगाने हो गए

उनकी महफ़िल में हम बेगाने  हो गए
जबसे   वो किसी और के दीवाने हो गए
समय  के ये सिलसिले   पुराने  हो गए
उनकी महफ़िल में हम बेगाने  हो गए
कोशिशे   बहुत  की हमने समझाने की
मन्नते भी की उनको  मनाने  की
वो न समझे   हमारे   दिल  के हालात  को
न समझे हमारे वो जज्बात को
वक़्त के हाथ   खिलोने बन गए
उनकी महफ़िल में हम बेगाने  हो गए

ये मेरे बचपन की बगिया है

ये मेरे बचपन की बगिया है
जिसको मैंने अपने सपनो से सींचा है
कुछ ख्वाब देखे इस आँगन में
जिसमे गिरते सम्भलते बहुत कुछ सीखा है
है कुछ बेगाने तो कुछ अपने भी
जिनके संग जीवन बीता है
कुछ अश्रु मिले कुछ खुशिया भी
जब हारके  सब कुछ जीता है
है अब तो पुराना खंडहर सा
नयनो का झुरमुट रूठ गया
जो साथ चलता  था उस पगडण्डी पे
अब साथ नही है बात नही
बस यादे  है बस यादे है
अब मन में नही कोई सपना है
और नहीं कोई अब अपना है
हाय मेरी इस बगिया को
जाने कौन लूट गया
जाने कौन लूट गया 

Sunday, July 13, 2014

जीने की चाहत न थी इस दिल में

जीने की चाहत न थी इस दिल में
तुम्हे देखकर जीने का मकसद मिल गया
हजारो सपने थे जहन में मेरे
लेकिन अब हकीकत से ये दिल रूबरू हो गया

Friday, July 11, 2014

मुझे दर दर मरने छोड़ दिया

क्यों हमारे सपने को चकनाचूर किया
हमने भी कुछ सोचा था पाने लिए
लेकिन उसने हमारी अस्मिता को झकझौर दिया
चंद लम्हों के सुकून की खातिर
हमारे सपनो को तोड़ दिया
अब अन्धकार है चारो तरफ मेरे
भविष्यहीन हो गया ये जीवन
उस बहसी दरिंदे ने मेरे
तन मन को छोड़ दिया
अब नही है जीने की आस मुझे
अब कोई नही है मेरे लिए
क्या क्या सोचा था हमने
उसने ख्वाबोको तोड़ दिया
उसने जिस्म की भूख मिटाई
मुझे दर दर मरने छोड़ दिया
मुझे दर दर मरने छोड़ दिया 

ये क्या हुआ इन सफेदपोशो को

ये क्या हुआ इन सफेदपोशो को
क्यों हमारी डूबी लुटिया डुबोना चाहते है
हम तो उठ नही सकते है ये मालूम है हमे
फिर ये क्यों हद से ज्यादा अपने को गिराना चाहते है
वादो को करना और तोडना तो इनकी फितरत है
हमे दर्द बहुत मिला है जमाने से
फिर ये क्यों तड़पाना चाहते है हमे


एक चाय मिल जाती तो शाम और दिलनशी हो जाती

एक चाय  मिल जाती तो
शाम और दिलनशी हो जाती
यहाँ मौसमी बारिस तो नही है
लेकिन ये मन फिर भी भीग  गया
जो तू नही मिली मुझे
गर तेरी यादे मिल जाती तो
सायद ये जिंदगी रंगीन हो जाती
हाँ तुमसे दूर हूँ मै फिर भी
पास यादें है तुम्हारी
और तन्हा ये आलम है
चांदनी रात भी कुछ याद दिला रही है मुझे
कुछ तो है और कुछ जो नही है
बस इसी कस्मकस में तड़पता है ये दिल
हाँ सुकु है थोड़ा ही सही
देखते है ये इंतज़ार कितना सितम ढाता है
ऐसी ही कुछ उन्सुल्झी पहेली है
तभी जिंदगी मेरी इतनी अकेली है
तो चलो अपनी चाय का ही सहारा लेते है
कुछ पल ही सही इसीके बहाने कुछ यादो को अपना बनाते है 

Thursday, July 10, 2014

क्यों हम इनकी बात करे जो हमारी नही सोचते है

क्यों  हम  इनकी बात करे जो हमारी नही सोचते है
जो सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ से जुड़े हुए है
इनका धर्म इनका कर्म इनका ईमान
और यह तक इनकी रोजी रोटी भी स्वार्थ से सनी हुई है
ये सिर्फ अपनी कुर्सी से प्यार करते है नाही हमसे नाही हमारे देश से
ये सफ़ेद कपड़ो में लुटेरे है
तो हम क्यों इनका विस्वास करे
हर पल हर लम्हा इन्होने हमारे सपनो को चकनाचूर किया है
तो हम क्यों इनसे  प्यार करे
ये राजनेता है इनको तुच्छ और गन्दी राजनीती करनी है
बस और कुछ नही
नहीं इनको अपने शब्दों पर नियंत्रण है नाही अपनी वाणी पर
ये हर शब्द पर राजनीती करते है
तो क्यों न हम इनका तिरस्कार करे 

मेरे कान्हा

मेरे कान्हा भी कभी कभी मेरे साथ सरारत करते है कभी कभी मुझे सताते है आज सुबह मई मंदिर में उन्हें स्नान करा रहा था उसके पहले उनका मुकुट और माला और उनके कपडे उतार रहा  था की स्नान कर लो  लेकिन कभी वो अपना माला खीच रहे  कभी अपना मुकुट नही दे रहे कभी इधर कभी उधर भाग रहे मुझे भी इनकी ये सरारत देख कर मन ही मन आनंद मिल रहा था और मै बार बार पुकार रहा कान्हा कान्हा इधर आइये मुझे और भी काम है लेकिन वो कहा मानने वाले वो आगे आगे मै पीछे पीछे आखिर  थककर मई एक तरफ बैठ गया तो अपनी मनमोहक मुस्कान के साथ मुस्कराते हुए मेरे पास आकर बैठ गए मैंने भी कहा की आप मुझे सताना चाहते थे ना
भाइयो ऐसा रोज होता है मेरे और मेरे कृष्णा के बीच क्या आप भी कभी बात करने की कोशिश किये अगर नही तो एक बार करके देखिये मै सच कहता हु इतना आनंद आपको कही नही मिलेगा
जय श्री कृष्णा
जय जय श्री कृष्णा

Wednesday, July 9, 2014

यूं टूट कर न रो मेरे दिल इस क़द्र

यूं टूट कर न रो मेरे दिल इस क़द्र
यहाँ कोई नही है तेरी सुनने वाला
रो रो के सायद ही आत्मा भीग जाये तेरी
रूह  काँप जाये चाहे  देखने  वालो  की
लेकिन नही कोई तेरी मुहब्बत को चाहने वाला

क्यों अपनी ही राह में हम मुसाफिर की तरह है

क्यों अपनी ही राह में हम मुसाफिर की तरह है
मुहब्बत को अपना आशियाना बना ले गर
मंजिले है बहुत इस राह में
कुछ सीधी है कुछ टेढ़ी है
कुछ का नहीं है पता तो
कुछ खुद ढूंढ  रही  है अपने पते को
मुहब्बत को अपना आशियाना बना ले गर
मंजिले है बहुत इस राह में
कुछ सीधी है कुछ टेढ़ी है
कुछ का नहीं है पता तो
कुछ खुद ढूंढ  रही  है अपने पते को 

ये जिंदगी क्यों इतनी नीरस हो गयी

ये जिंदगी क्यों इतनी नीरस हो गयी यहाँ तो मेरे पास सब कुछ है सिर्फ तुम्हारे सिवा फिर भी मन  में आज ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है क्या ये प्रेम   में  विरह की पीड़ा  है  या  फिर और  कुछ। कुछ भी समझ नही आ  रहा है न ही कुछ करने  को  मन हो रहा है न ही कही आने  का  न ही कही जाने का ये क्या है क्या मै प्रेम से परिचित हो रहा हु  या ये समय  मुझे  इस  से अपना परिचय कराना  चाह  रहा है
और क्या है प्रेम की वास्तविकता  क्या हम एक  दूसरे  से जुदा होते  है तभी हमे वास्तविक प्रेम का एहसास होता है या हमारा छोटी छोटी बातो पर लड़ना झगड़ना रूठना फिर मनाना ये भी प्रेम का ही स्वरुप है हाँ मैंने  कभी कभी ये एहसास जरूर किया है की जब थोड़े  थोड़े  अंतराल  पर हम अपने  परिवार  से दूर  होते है तो हमे अपनी कमियों का भी एहसास होता है और अपनों के प्यार  का भी एहसास होता है लेकिन दूर होकर  ही क्यों मै ये जानना चाहता हूँ
की वास्तविक रूप  क्या है प्रेम का कैसे  उस  से साक्षात्कार  होगा  हमारा

वो लड़ना झगड़ना वो रूठना मनाना

वो लड़ना झगड़ना वो रूठना मनाना
वो रूठ के जाना मेरा घंटो मनाना
कभी कान पकड़ते तो कभी इसारो में कहते
की मान जाओ सनम मान जाओ
अब हम न करेंगे सरारत
बस करेंगे मुहब्बत
उन पलो में भी क्या था
जो आज नही है
तब मेरे सपने ही हकीकत थे
लेकिन आज ख्वाब भी नही है
तंग गालिया  हुई  अब
अब रहा न वो बचपन
उम्र के इस सफर ने
ढाया है ये सितम

दम घुटता है इस आशियाने में कभी कभी

दम घुटता है इस आशियाने में कभी कभी
क्योकि सब कुछ है इसमें पर तुम नही
आती है हर पल वो आहट तुम्हारी
जब चुपके आके कान में कुछ कह जाती थी
कुछ आता था समझ में कुछ धुंधला जाता था
कभी कभी अँधेरे में भी नजर आती थी मेरी जानशी

There is a difference between love and attraction, why not let him forget that today's generation

There is a difference between love and attraction, why not let him forget that today's generation
Love is as vast as the ocean
It is very subtle attraction
Love is compassion, in kindness
If there is a desire to charm
Love is Paphin
Attraction is absorbed in sin
Love teaches us to live
Drops into a ditch so deep attraction
Why do we not recognize the address
The difference in both ground Asman

प्यार और आकर्षण में बहुत अंतर होता है न जाने आज की पीढ़ी इसको पहचान ने में क्यों भूल करती है प्रेम सागर की तरह विशाल है

प्यार और आकर्षण में बहुत अंतर होता है न जाने आज की पीढ़ी इसको पहचान ने में क्यों भूल करती है
प्रेम सागर की तरह विशाल है
तो आकर्षण बहुत ही सूक्ष्म है
प्रेम में दया है करुणा है
तो आकर्षण में वासना है
प्रेम पापहीन है
आकर्षण पाप में लीन है
प्रेम हमे जीना सिखाता है
तो आकर्षण गहरे खड्डे में गिराता है
फिर हम क्यों नही पहचान पते है
दोनों में जमीन आस्मां का अंतर है

Saturday, July 5, 2014

एक अधूरा जहां अधूरे लोग अधूरी नियत अधूरी इंसानियत

एक अधूरा जहां अधूरे लोग अधूरी नियत अधूरी इंसानियत
ये कहा आ गए ख़ुदा जहा न लोगो के पास दिल है
न ही इंसानियत न ही एक दूसरे से बोलना चाहते है
सिर्फ और सिर्फ पत्थर की मूर्ती है
सब अपने अहम में खोये हुए है
यह मै ही मै है हम नही है
झूठा संसार है झूठे लोग
इस से तो अच्छी थी अपनी मिटटी
अपना घर अपना सहर अपनी धरती अपना देश
नही चाहिए मुझे धन
नहीं चाहिए मुझे दौलत
मुझे चाहिए दिल का जहां
दिलवाले लोग
सच्चे दोस्त

चाहत अभी अधूरी है दोस्तa

चाहत अभी अधूरी है दोस्त
क्योकि चाँद खेल रहा है आंखमिचौली
आजाओ फलक पे ये इल्तेजा है मेरी
मत सताओ मेरी मुहब्बत को
प्यासी वो है तो बेचैन है हम भी
आ जाओ आ जाओ आ जाओ
बस कुछ साँसे है अधूरी 

चाहत अभी अधूरी है दोस्त

चाहत अभी अधूरी है दोस्त
क्योकि चाँद खेल रहा है आंखमिचौली
आजाओ फलक पे ये इल्तेजा है मेरी
मत सताओ मेरी मुहब्बत को
प्यासी वो है तो बेचैन है हम भी
आ जाओ आ जाओ आ जाओ
बस कुछ साँसे है अधूरी 

Friday, July 4, 2014

वो इसारे से समझाना

वो इसारे से समझाना
अंजानी भाषा में बात करना
कुछ भी कहने में असमर्थ शब्दों से
लेकिन इसारो से बया करना
वो तुतलाती हुई जुबा से
नन्हे नन्हे कदमो पे आना
कभी गिरना कभी सम्भलना
फिर उठके मेरी गोदी में आना
वो मासूमियत वो मुस्कान
याद रहेगी मेरे दिल हमेसा
मेरा नन्हा सा दिल
जाने मुझसे क्या कहता
इन पलो में जैसे सारा जहां समय है
जन्नत की शैर से काम नही ये पल मेरे लिए
मेरे लाल तू जुग जुग जिए
मेरे लाल तू जुग जुग जिए
मेरे लाल तू जुग जुग जिए 

So why do we have so much crime

Never in thanking the same
How were we going to ask them questions
We never used to talk to the moon in lonely nights
Just what we think we were right then or now
Then there was nothing to me except the heart
Today, everything else is just heart
Then we'd find a few money from happiness
happiness earn millions thirsting for now is too small
Relationships were then used as the friend of man
Now just means that the partner
The only time when there was no work for yourself
There is time for work and loved ones today
Never mind gets sad sometimes sobbing sobbing cries of
Nobody is listening to my voice today to the
If the above prey
If we can not tolerate such atrocities you
So why do we have so much crime
So why do we have so much crime

तो इतने गुनाह क्यों हमने किये

कभी ख्यालो में ऐसे ही
उन से जाने कैसे सवाल पूछते थे हम
कभी तन्हा रातो में चाँद से बाते करते थे हम
अभी सोचते है हम की क्या हम तब ठीक  थे या  अब  हम
तब कुछ भी नही था मेरे पास इस दिल के सिवा
आज सब कुछ है बस दिल के सिवा
तब हमे खुसी मिल जाती थी चंद पैसो से
अब लाखो कमा कर भी छोटी सी खुसी के लिए तरसते है
तब रिश्ते थे नाते थे यार थे दोस्त थे
अब बस मतलब के साथी है
तब समय ही समय था अपने लिए कोई काम न था
आज काम ही काम है समय नही है अपनों के लिए
कभी उदास हो जाता है मन तो कभी सिसक सिसक के  रोने लगता है
आज कोई नही है मेरी आवाज को सुन ने के लिए
करते है गुजारिस ऊपर वाले से
अगर हम सह नही सकते है इतने जुल्म तुम्हारे
तो इतने गुनाह क्यों हमने किये
तो इतने गुनाह क्यों हमने किये

he smiles miss Evening When sunset came yawning

he smiles miss Evening
When sunset came yawning
A voice came from the mind of
Get a cup of tea
We used to say in a low tone gingerly
O listen to the evening's set!
The voice was sharp and Bhunbhunati
Ya know what I need you more than me
We were also a little amused were Fuslate
He grabbed his ears were occasionally observed
I put a smile on your face melt hearts
You do get the occasional cry too
We both seemed to flow into the flow of emotions
May your tea brought two right moment
She walked back into the kitchen we
It calls to mind some mischief
Go back to your arms, and took over the
It is not just the story of a tea
This aspect of our lives haseen
Sometimes we laugh at the Loneliness
Are sometimes laugh laugh then cry
Strange Love it love it
In love tease and Srart

वो मुस्कराती हुई शाम याद आती है जब शाम ढलते ही जम्हाई आती थी

वो मुस्कराती हुई शाम याद आती है
जब शाम ढलते ही जम्हाई आती थी
मन से एक आवाज आती थी की
एक चाय की प्याली मिल जाए
हम भी धीमी आवाज में डरते डरते कहते थे
अजी सुनती हो शाम ढलने को है
उधर से तेज और कुछ भुनभुनाती हुई आवाज आती
हां पता है मुझे मुझसे ज्यादा किसकी जरुरत है तुम्हे
हम भी थोड़ा बहलाते थे थोड़ा फुसलाते थे
कभी कभी अपने कान पकड़कर उनको मनाते थे
लगा दिल पिघला चेहरे पे एक मुस्कान आई
जाओ आप भी रुला देते हो कभी कभी
हम दोनों भावनाओ के प्रवाह में बहने लगते थे
ठीक है ठीक है आपकी चाय मई दो पल में लाई
वो रसोई में जाती हम पीछे से पहुंच जाते
मन ये कहता कुछ शरारत करे
पीछे जाके भर लेते थे अपनी बाहो में
सिर्फ ये एक चाय की कहानी नही है
ये हमारे जिंदगी के हसीं पहलू है
जो तन्हाई में कभी हमको हँसते है
तो कभी कभी हँसाते हँसाते रुला जाते है
अजीब है ये प्यार ये मुहब्बत
प्यार में चिढ़ाना और ये सरारत

हमे काफ़िर समझे दुनिया तो समझने दो पर हम तुम्हारी इबादत करेंगे

हमे काफ़िर समझे दुनिया तो समझने दो
पर हम तुम्हारी इबादत करेंगे
टूट जाये चाहे जितने महल सपनो के
लेकिन दिल न टूटने देंगे अपनों के
हर तूफ़ान से लड़ेंगे
कभी गिरेंगे कभी संभलेंगे
आसमा पे उड़ने की ख्वाइश नही है मेरे दोस्तों
उनको मुमताज तो हम मुहब्बत के शाहजहाँ बनेंगे
बंदगी करेंगे हमेसा हर दिल की
जो मुहब्बत को जिंदगी समझते है
हमे काफ़िर समझे दुनिया तो समझने दो
पर हम तुम्हारी इबादत करेंगे

Thursday, July 3, 2014

आमीन आमीन

आज खुद मेहरबान है मुझपर
उसकी इनायत कुछ ज्यादा ही आज है
कुछ तो बात है आज में
की मुकद्दर आसमा पे है
छु लेने का मन आज चाँद और तारो को है
क्योकि आज गुलसिता ही मेरे पास है
आमीन आमीन

मनुष्यता पर प्रहार

आजकल हम क्यों मनुष्यता पर प्रहार करने से नही चूकते है क्यों कभी कभी हम मासूमियत का भी गाला घोटने से हिचकिचाते नही है आजकल की दिनचर्या अपनी संस्कृति से खिलवाड़ ये क्या है क्यों हम इतने क्रुद्ध और निर्मम होते जा रहे है क्या दया भाव का लोप होता जा रहा है ऐसा क्यों सायद हम अत्यधिक स्वार्थी हो गए है और इतना की सिर्फ मै ही मैं दिखाई देता है और कछ दीखता ही नही हमारे आँखों के सामने उजाला होते हुए भी हम अन्धकार में ही जीना चाहते है या आदी हो गए है ऐसी दिनचर्या के लिए क्यों हम बदल नही सकते है क्या ये इतना कठिन कार्य है हमे बदलना होगा
सायद बदलाव ही उपाय है लेकिन ऐसा नही जैसा आजकल है
बदलाव सार्थक होना चाहिए

वृन्दावन की गलिन में न आना सखी मुरली वाले को तुम न बुलाना सखी

वृन्दावन की गलिन में न आना सखी
मुरली वाले को तुम न बुलाना सखी
वो तो है ही चितचोर सखी
बावरा हम को वो तो कर जायेगा
फिरती रहूंगी फिर मई गली गली
वृन्दावन की गलिन में न आना सखी
मुरली वाले को तुम न बुलाना सखी 

क्यों

क्यों अपने कुछ स्वार्थ में वशीभूत होकर हम अपने धर्म को अपने आत्मा को अपने मैं को भी दाव पर लगा देते है क्या यही मनुष्यता है क्या यही हमारे पूर्वजो ने हमे सिखाया है क्या यही हमारी संस्कृति है जिसके लिए हम संपूर्ण संसार में जाने जाते है ....

धर्म और दया सबसे बड़े हथियार है

धर्म और दया सबसे बड़े हथियार है जिनसे हम संपूर्ण विस्वा को अपना बना सकते है
Righteousness and mercy which is the biggest weapon that we can complete your world

ek muskaan: जब जब आईने में देखा हमने उनको

ek muskaan: जब जब आईने में देखा हमने उनको: जब जब आईने में देखा हमने उनको तो लाखो बार मदहोश क्यों हुए हम हम अपन आप को तो देखते रोज आईने में लेकिन एक बार भी हम बेहोश ना हुए हम यही ...

when we saw him in the mirror Why then slew a million times, we

when we saw him in the mirror
Why then slew a million times, we
If you see of yourself in the mirror everyday we
But we were not too faint
That is the question we are asking ourselves
He Nur heaven or no Khksha
The prayer of the heart every moment that beauty
We think the same is staring in the mirror
We would love to get myself one day
But challenged every moment by yourself
Why is this so in love

क्यों

क्यों अपने कुछ स्वार्थ में वशीभूत होकर हम अपने धर्म को अपने आत्मा को अपने मैं को भी दाव पर लगा देते है क्या यही मनुष्यता है क्या यही हमारे पूर्वजो ने हमे सिखाया है क्या यही हमारी संस्कृति है जिसके लिए हम संपूर्ण संसार में जाने जाते है ....

We also passengers on the road my friend

We also passengers on the road my friend
See you then walk a few steps with me
Will realize the sun shade
Between stranger be with loved ones
Be broken, no matter how the Orangery
But the heart will always palace Dream

ek muskaan: बाहो की अंजुमन में इक बार चले आओ

ek muskaan: बाहो की अंजुमन में इक बार चले आओ: बाहो की अंजुमन में इक बार चले आओ  इस बिरह की वेदना कुछ तो कम होगी

लेकिन दिल में हमेशा सपनो का ताजमहल होगा

हम भी इस राह के मुसाफिर है मेरे दोस्त
कुछ कदम मेरे संग तो चल के तो  देखिये
धुप में भी छाँव का एहसास होगा
बेगानो के  बीच भी अपनों का साथ होगा
चाहे कितने ही टूट जाये शीशमहल
लेकिन दिल में हमेशा सपनो का ताजमहल होगा

Wednesday, July 2, 2014

बाहो की अंजुमन में इक बार चले आओ

बाहो की अंजुमन में इक बार चले आओ 
इस बिरह की वेदना कुछ तो कम होगी

अंजामे मुहब्बत की परवाह नही है हमे

अंजामे मुहब्बत की परवाह नही है हमे
हम तो तुफानो से रोज लड़ते है
दिल में जज्बा है और साथ है तुम्हारा तो
खुद से भी लड़ने की ताकत हम रखते है

गमो की बारिशे बहुत है

गमो की बारिशे बहुत  है
इस अँधेरे समाज में
जो  देख नही  सकते
वो भी इल्जाम लगाते है  हम पर

Sunday, June 29, 2014

acid attack in our hearts

The acid throwing incidents is growing in our country these days Bdin our mindset rolled reflecting how our mindset can not leave everything in the hands of the government. We also have some responsibility towards our society and our own country prati hum kab tak apni jimmedari se muh...
तेजाब फेकने वाली घटनाएं दिन बदिन हमारे देश में बढ़ती ही जा रही है ये हमारी मानसिकता को दर्शाती है की कितनी गिर गयी है हमारी मानसिकता हर चीज हम सरकार के भरोसे नही छोड़ सकते। हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है अपनों के प्रति अपने समाज  के  प्रति अपने देश  के प्रति   हम  कब  tak   apni  jimmedari  se muh modte rahenge ya hume intzaar hai ki humare sath bhi ye  ghatna  ho tb hum jaagenge    

My hence linked to the crime by a Mine

My hence linked to the crime by a Mine
But at the time it had ever wanted from life
She was angry with me for a few moments
Asks of me each moment of time
How to cut without their
We also think
Some telling MNS
Are wet from your tears
It is rainy, this is the
But inside it boasts a sweet little pain
It is also felt
We also look forward remains
That moment will come when the
And she is angry
Which is connected Us
Which lost me the moment
She'll get
She's get

बहुत गुनाह किया मेरे हमसफ़र तुझको अपने से जुदा करके

बहुत गुनाह किया मेरे हमसफ़र तुझको अपने से जुदा  करके
लेकिन ये वक़्त की मजबूरी थी जो कभी चाहते थे जिंदगी से बढ़कर
वो कुछ लम्हों के लिए खफा हुए मुझसे
की वक़्त का हर लम्हा पूछता है मुझसे
कैसे कटे उनके बिन
हम भी कुछ सोचते  है
कुछ कहते कहते मनसे
भीग जाते है अपने आनुओ से
ये बारिस है अति है जाती है
लेकिन एक मीठा सा दर्द जो समेटे हुए है अपने अंदर
उसका भी एहसास करा जाती है
हमे भी इन्तजार रहता है
की कब वो पल आएगा
और वो जो खफा है
हमसे जो जुड़ा है
खो गए है जो मुझसे मेरे पल
वो मिल जायेंगे
वो मिल जाएंगे

Come memories comes and goes If some cry, some laugh

Come memories comes and goes
If some cry, some laugh
Is settled in the heart of some myself smiling
Have got used to living with them

यादे आती है आके चली जाती है

यादे आती है आके चली जाती है
कुछ रुलाती है तो कुछ हंसाती है
कुछ खुद ही मुस्करा के दिल में बस जाती है
इनके संग जीने की आदत होगयी है

I appreciate your tears of

I appreciate your tears of
But something in me where
Which takes me away from you!
But I am not disloyal
  But it is still

तेरे आंसुओ की क़द्र है मुझे

तेरे आंसुओ की क़द्र है मुझे
मगर कुछ है मेरे जहाँ में
जो मुझे तुझसे दूर ले जाता है
मै बेवफा नही मगर
 लेकिन फिर भी ऐसा क्या है

Friday, June 27, 2014

Your innocent smile Cordiality of the river

Your innocent smile
Cordiality of the river
If you like the holy Ganges
If you like white Vinawadini
Tujme mother of sharp Jagjanani
In just a few moments to consume
Anger Work to demon fascination
Hail Hail Hail to thee forever
Mother Ambe

तेरी मासूम मुस्कराहट निश्छलता की नदी है जैसे

तेरी मासूम मुस्कराहट
निश्छलता की नदी है जैसे
पवित्र है तू गंगा की तरह
स्वेत है तू वीणावादिनी की तरह
तेज है तुझमे माँ जगजननी का
भस्म कर देती हो बस कुछ क्षणों में
काम क्रोध मोह रूपी राक्षस को
तेरी जय हो जय हो सदा ही जय हो
माँ अम्बे

Some ocean in my eyes

Some ocean in my eyes
If the heart is always in
storm bring me some thoughts
So keep quiet my mind
Sometimes silence is too nervous
So sometimes the cries of without tears Eyes
Sometimes it gets damp soul
The smile every moment of your memories
The heart of my C Speed ​​is Slow
But it is the ocean and we've Storm
A thirsty river my love
Out to meet the ocean of the mind
Avoid this also
We no less perhaps
But she is given less
Or do we mistake

कुछ समंदर है आँखों में मेरे

कुछ समंदर है आँखों में मेरे
तो कुछ दिल   में रहते है हरदम
कुछ तूफां  लाते है विचारो  में मेरे
तो कुछ खामोश रहते है मन  में मेरे
कभी कभी ख़ामोशी  में भी बेचैनी सी होती है
तो कभी कभी बिन आंसुओ के रोती है  ये आँखे
कभी कभी नम हो जाता है जहन
जो सताती है  हर  पल  यादे  तेरी
मद्धम सी रफ़्तार  हो जाती  है  इस  दिल  के  मेरे
लेकिन ये समंदर है और हम तूफ़ान है
मुहब्बत है मेरी एक प्यासी नदी
है जो इस मन के सागर से मिलने चली
बचें ये भी तो
सायद हम भी कम नहीं
लेकिन देखते है वो कम है
या हम में है कमी

Your memories of the tulip is guarded all the time

wishes with adversity and to live life with you!
Your memories of the tulip is guarded all the time
Occasionally someone asks me to Asco
Each strand will process the glove love
By far, this is not a floor monitor
No there is not no river littoral
Still have peace in my heart
Eyes still waiting
Will be in this rahne ke liye dil

आँखों में इन्तजार है अब भी

तुझ संग खयालो के संग जीना बहुत मुस्किल  है जिंदगी
हर वक़्त पहरा रहता है सुर्ख यादो का तेरी
मेरे अस्को से कोई पूछेगा कभी
तो हर कतरा बया करेगा दस्ताने मुहब्बत
है दूर तक नजर अति नही  कोई मंजिल
नाही कोई दरिया है नाही कोई साहिल
फिर भी सुकून है दिल  को मेरे
आँखों में इन्तजार है अब भी
की आएगा कोई इस दिल  में रहने  के  लिए

ऐ जिंदगी तुझ संग मुस्कराहटों के संग

ऐ जिंदगी तुझ संग मुस्कराहटों के संग 
कुछ लम्हे हमने भी सजाये है 
जो छोटे छोटे  फूलो   की  महक से महकने लगे है
लेकिन गर्मी के  सितम  से  ये कुम्हलाने लगे  है 
इंतज़ार है तो बारिस की कुछ बूंदो का
जिनको पाकर सायद कुछ जिंदगी  की साँसे  मिल जाए

प्यार एक अप्रयास हींन प्रक्रिया है जो की नही जाती अपितु हो जाती है

कभी कभी हमारे जीवन में बहुत उथल पुथल होती है लेकिन हम क्या कर सकते है हम मजबूर होते है उन परिस्थितियों के लिए क्योकि उनपर हमारा नियंत्रण नही होता है और उसका एक मात्र यही कारण होता है की दिल पर सभी का जोर नही चलता क्योकि दिल सिर्फ अपने तरीके से चलता है अपनी करता है उस पर हमारा बस नही चलता है और हम यही सोचते रहते है की कैसे भी इसको नियंत्रित करे परन्तु। …… हम असहाय होते है
और हम ये क्यों सोचते है की हम जो चाहे वो कर सकते है चाहे वो गलत हो  चाहे वो सही हो क्यों हम सिर्फ अपनी बात मनवाने के लिए मन को विवस कारण की कोशिश करते है ये तो सरासर गलत है

लेकिन सायद ये कहना सच है की प्यार एक अप्रयास हींन प्रक्रिया है जो की नही जाती अपितु ही जाती है जब हमारा जोर ही नही इस पर तो जमाना हमे क्यों दोष देता है 

Thursday, June 26, 2014

शूट बूट पहनने मात्र से आदमी सभ्य हो जाता है क्या

जब मै अपने देश भारत में था तो सोचता था की यहाँ के लोग कितनी राजनीती खेलते है लेकिन अब जब मै बहरीन में हु तो यहा तो बहुत ज्यादा हमारे देश के लोग ही हमे नही देखना चाहते है
 लोग एक दूसरे से बात करने में  अपनी बेज्जती समझते है जो अपने देश में सिर्फ पेंट शर्ट पहनते थे यह आकर टाई पहनना सीख लिया है तो ये समझने लगे की वो बहुत बड़े हो गए है उनके बराबर कोई है ही नही लेकिन क्या शूट बूट पहनने मात्र से आदमी सभ्य हो जाता है क्या 

Monday, June 23, 2014

What man does not wear old clothes in rags

Did not I understand fashioned
I do not want to understand or freezing
Maybe I am wrong in my thinking proceed or
But how do these cool ideas
The sea was calm, which
So why did it ever inundation of the sea
What man does not wear old clothes in rags
If we tie to wear pants or boots humanity was our estate
Who else thinks some people understand this May,
These are not made by the Upper Bulkhead
So we have to understand why I am the
May these words I had heard the name brings to mind an important
But if I were crooked

क्या फटे पुराने कपडे पहनने वाला इंसान नही होता

मै नही समझ पा रहा हु जमाने को
या जमाना समझना नही चाहता मुझे
शायद मै गलत होऊ या मेरी सोच
लेकिन कैसे शांत करू इन विचारों को
कभी शांत था ये समंदर जो
तो कभी ये लहरो का सैलाब क्यों आया
क्या फटे पुराने कपडे पहनने वाला इंसान नही होता
या हमने टाई पैन्ट बूट पहन लिए तो इंसानियत हमारी जागीर हो गयी
कुछ लोग ये  समझते  तो मई कुछ और समझता हु
उप्पेर वाले ने ये दिवार नही बनाई
तो हम क्यों समझते है अपने को मै
मैंने सुना  था ये मई नाम का शब्द अहम लाता है मन में
लेकिन सभी मैं कुटिल हो गए तो
उनका गुनाह है क्या 

Sunday, June 15, 2014

तूफां है इस दिल ने लाखो समेटे हुए

तूफां है इस दिल ने लाखो समेटे हुए
शांत है हम समंदर की तरहा
लहरे आती है तो मंन में ज्वार उठता है कभी
कभी मद्धम होता है तो साँसे रुक जाती है
सैलाब है जमाने की तरहा इस दिल में भी
कभी संभलते है तो कभी गिर जाते है
उम्र हुई नही है मेरी अभी जवानी की
लेकिन मुहब्बत में कदम लड़खड़ाते है 

कितनी दूर चले ये कदम कभी चलते है कभी रुक जाते है

कितनी दूर चले ये कदम कभी चलते है कभी रुक जाते है
बाहो के दरमियाँ आके कुछ साये भी छिन जाते है
दिल ये ख्वाइसे तो तमाम करता है लेकिन
सपने मंन में भी बहुत है
लेकिन मेरा दिल है दिल कोई दरिया तो नहीं
इसीलिए लोग डूब जाने के दर से भाग जाते है
कैसे समझाए उस बेवफा मुहब्बत को
जिसके बिन गुजर दी हमने सारी जिंदगी
ताउम्र कैद में रहे उनकी जुल्फों में
फिर भी ये दिल तोड़ दिया तो हम क्या करे 

हम रहे न रहे ये वादिया तो रहेंगी

हम रहे न रहे ये वादिया तो रहेंगी
कुछ भी हो हमे याद तो करेंगी
की गुजरेंगे पल इनके औरो के साथ भी
लेकिन हम संग बीती ये कहानिया कहेंगी
की मुस्कान आये न आये चेहरे पे इनके
हम अस्को से नहा लेंगे इनकी खुशी की खातिर
और भी फ़िज़ा होगी
बदली बदली ये हवा होगी
नही होंगे तो हम इनके संग
लेकिन जहा भी गुजरेंगे ये
संग संग मेरी परछाईया होंगी
हम रहे न रहे ये वादिया तो रहेंगी 

आनंद की अनुभूति

आनंद की अनुभूति हमे ईश्वर के समीप ले जाने का काम करती है जैसे जैसे हम अपने आप में खोते जाते है वैसे वैसे हम उस इस्वर के समीप पहुँचते जाते है जो संपूर्ण संसार में विद्यमान है और सभी का पालन पोषण करता है ये अनुभूति ना ही बनाई जाती है न ही हमारे चाहने से मिलती है ये तो स्वयं ही हमारे मन में रहती है हमारा मन इस आनंद रुपी समुद्र का छोटा सा घरोंदा होता है सच कहे तो वास्तव में इसको पाना इसमें खोना अपने आप में डूबने जैसा होता है जिसमे खोने के पश्चात हमारी ही नहीं अपितु हमारे पूरे जीवन की कोई भी आकांक्षा नही रह जाती है सारी इच्छाए खो जाती है और हम स्वयं में खो जाते है अपने आप में अदृश्य हो जाते है और सिर्फ एक ही रूप दिखाई देता है जो निराकार है और वही हमारे यथार्थ जीवन का अनुभव कराता है
तो आओ हम सभी इस प्रेम के सागर में डुबकी लगाकर उस निराकार परम बृम्हा से साक्छात्कार होते है उनके दर्शन करके अपने जीवन को पूर्ण करता है

जय श्री कृष्णा

Wednesday, June 11, 2014

जागो खुद अर्जुन बनो खुद कृष्णा तुम्हारे अंदर है

हमे अपने अंतर्मन में निश्चित करना चाहिए कि हम क्या है ,हमारा जन्म क्यों हुआ ,हमारा इस धरती में जन्म लेने का उद्देश्य क्या है हमे अपने आप से ये सवाल करना चाहिए और अपने आप को जानना बहुत ही आवश्यक होता है और जो मनुष्य अपने आप को नही जान पाया वो भला दुसरो कैसे जान सकता है कैसे समझ सकता है परन्तु हमे आत्मचिंतन करना चाहिए क्या हम जीवन भर ऐसे ही अपने जीवनचक्र में भ्रमित रहेंगे क्या हमे अपने स्वयं के लिए अपने पास समय नही है
अगर हम ऐसे चलते रहेंगे  ऐसे ही जलते रहेंगे ऐसे ही घुलते रहेंगे  तो हम आने वाले समय के साथ न ढल पाने के कारण भस्म हो जायेंगे या तो स्वयं

या फिर समय हमे भस्म कर देगा
उठो जागो नए सवेरे का सृजन करो
हम सब संगठित होकर ये प्रण ले कि
हम अपने साथ साथ मानवहित भी करेंगे
अन्यथा हम भस्म हो जाएंगे

जागो खुद अर्जुन बनो खुद कृष्णा तुम्हारे अंदर है
खोजो पाओ
जय श्री कृष्णा

Monday, June 9, 2014

Wake bhaiya

India India India is our country too and even aaryaavart
Hardly any country has
The name is linked to our culture, our civilization is associated with
We Gangajmuni ancient civilization living example of this is when our mind is so profound love me so Biswas is why we come to the matter of a few people in your culture
Who are
Or God is wrong. ........................
My humble request to all of India Wasio by the fighting stops Sampridayik
The courage to fight for education
Fight for your bright future
Those who have little to overcome difficulties Fight
The issue is not that we do not like we do not want to think not
Because narrow is our Manshikta
Change
Wake
Take lane determination of a new dawn
Fight to reach a new pinnacle on India
Dares to show
Suffocate
Why was shut


Wake bhaiya

जागो

हमारे देश का नाम इंडिया है भारत भी है हिन्दुस्तान भी और आर्यावर्त भी
शायद ही किसी देश का नाम होंगे
ये नाम हमारी संस्कृति से जुड़े है  हमारी सभ्यता से जुड़े है
हम प्राचीनकाल से एक है गंगाजमुनी सभ्यता इसका जीता जागता उदाहरण है जब हमारे मनme इतना विस्वास है इतना प्रगाढ़ प्रेम है तो हम चंद लोगो की बातो में आकर क्यों अपनी संस्कृति
अपनी सभ्यता अपनी मानवता डाव पर लगा देते है क्यों हम मानसिक रूप से इतने कमजोर है यह सभी धर्म के लोग रहते है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई फिर हम क्यों धर्म के नाम पर लड़ने को तैयार हो जाते है जब ये भेद ईश्वर ने नही किया तो हम कौन होते है
या फिर ईश्वर गलत है। ……………………
सभी भारत वासियो से मेरा विनम्र अनुरोध है की ये सम्पृदयिक झगड़े बंद करके
हिम्मत है तो शिक्षा  के लिए लड़ो
अपने उज्जवल भविष्य के लिए लड़ो
छोटी छोटी जो परेशानिया है उनको दूर करने के लिए लड़ो
ऐसा नही की मुद्दे नही है पर हम करना नही चाहते हम सोचना नही चाहते
क्योकि हमारी मानशिकता संकीर्ण हो गयी है
बदलो
जागो
एक नया सवेरा लेन का संकल्प लो
भारत को नए सिखर पर पहुचने के लिए लड़ो
हिम्मत है तो कर के दिखाओ
है दम
क्यों बोलती बंद हो गयी


जागो भैया jaago 

Sunday, June 8, 2014

अध्यात्म

अध्यात्म हमारे जीवन का अभिन्न अंग है जो हमारे शरीर के प्रत्येक भाग में बसा हुआ है और इसमें खोकर अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है ये हमारे ऋषि मुनियो के तेज का प्रतीक है प्राचीन काल से हम इस योग को करते चले आ रहे है लेकिन अब न जाने क्यों हमारी आज की पीढ़िया ये भूलती चली  जा  रही  है   अगर हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को ऐसे  ही भूलते  रहे तो ये निश्चित है की ये विलुप्त हो जाएँगी और अगर ये विलुप्त हुई तो समझ  लो की श्रिष्टि का अंत निश्चित है
मेरा विनम्र निवेदन है इसको जीवित रखो  न सिर्फ अपने समाज में अपितु अपने तन में अपने मन में अपने जीवन में
जय श्री राधे कृष्णा






Saturday, June 7, 2014

love foreever

The crime was passed in the halls take the name of love 
Leaning lived every moment of eye contact with the society under Dkianusi 
Ever walked gingerly courage 
Never had stopped walking steps

तेरे लिए हम है जिए

गुजरी गलियो में मुहब्बत का नाम लेना गुनाह था
नजरे हर पल झुकी रहती थी समाज की दक़ियानूसी  के तले
कभी गुजरते थे हिम्मत करके डरते डरते
कभी रुक जाते थे कदम चलते चलते 

My Love

My love for them is the value of our Iltja
This is where people will otherwise dreary Tarsenge
By hearing the name of love
Let me make this prayer to assume
I wish to express the mind of a Jnmo
These ruins would otherwise lead a heart
It would have been shattered Taj mahal of mind

Hamari Iltza

हमारी इल्तजा है उनसे की मान जाए मेरी मुहब्बत को
वरना सुनसान कर देंगे ये जहाँ और लोग भी तरसेंगे
मुहब्बत का नाम सुनने से
मान जा मेरी बात कर लेने दे ये इबादत
एक इकरार की मन्नत है मन मेरे जन्मो से
वरना खंडहर हो जायेगा ये शीशा ए दिल
चूर चूर हो जायेगा ये मन का ताज महल