Sunday, August 20, 2017

प्रेम कहाँ है??

प्रेम कहाँ है??

एक साधक ने अपने दामाद को तीन लाख रूपये व्यापार के लिये दिये। उसका व्यापार बहुत अच्छा जम गया लेकिन उसने रूपये ससुरजी को नहीं लौटाये। आखिर दोनों में झगड़ा हो गया। झगड़ा इस सीमा तक बढ़ गया कि दोनों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना बिल्कुल बंद हो गया। घृणा व द्वेष का आंतरिक संबंध अत्यंत गहरा हो गया। साधक हर समय हर संबंधी के सामने अपने दामाद की निंदा, निरादर व आलोचना करने लगे। उनकी साधना लड़खड़ाने लगी। भजन पूजन के समय भी उन्हें दामाद का चिंतन होने लगा। मानसिक व्यथा का प्रभाव तन पर भी पड़ने लगा। बेचैनी बढ़ गयी। समाधान नहीं मिल रहा था। आखिर वे एक संत के पास गये और अपनी व्यथा कह सुनायी।
संत श्री ने कहाः 'बेटा ! तू चिंता मत कर। ईश्वरकृपा से सब ठीक हो जायेगा। तुम कुछ फल व मिठाइयाँ लेकर दामाद के यहाँ जाना और मिलते ही उससे केवल इतना कहना, बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा कर दो।'
साधक ने कहाः "महाराज ! मैंने ही उसकी मदद की है और क्षमा भी मैं ही माँगू !"
संत श्री ने उत्तर दियाः "परिवार में ऐसा कोई भी संघर्ष नहीं हो सकता, जिसमें दोनों पक्षों की गलती न हो। चाहे एक पक्ष की भूल एक प्रतिशत हो दूसरे पक्ष की निन्यानवे प्रतिशत, पर भूल दोनों तरफ से होगी।"
साधक की समझ में कुछ नहीं आ रहा था। उसने कहाः "महाराज ! मुझसे क्या भूल हुई ?"
"बेटा ! तुमने मन ही मन अपने दामाद को बुरा समझा – यह है तुम्हारी भूल। तुमने उसकी निंदा, आलोचना व तिरस्कार किया – यह है तुम्हारी दूसरी भूल। क्रोध पूर्ण आँखों से उसके दोषों को देखा – यह है तुम्हारी तीसरी भूल। अपने कानों से उसकी निंदा सुनी – यह है तुम्हारी चौथी भूल। तुम्हारे हृदय में दामाद के प्रति क्रोध व घृणा है – यह है तुम्हारी आखिरी भूल। अपनी इन भूलों से तुमने अपने दामाद को दुःख दिया है। तुम्हारा दिया दुःख ही कई गुना हो तुम्हारे पास लौटा है। जाओ, अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगो। नहीं तो तुम न चैन से जी सकोगे, न चैन से मर सकोगे। क्षमा माँगना बहुत बड़ी साधना है।"
साधक की आँखें खुल गयीं। संत श्री को प्रणाम करके वे दामाद के घर पहुँचे। सब लोग भोजन की तैयारी में थे। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा उनके दोहते ने खोला। सामने नाना जी को देखकर वह अवाक् सा रह गया और खुशी से झूमकर जोर जोर से चिल्लाने लगाः "मम्मी ! पापा !! देखो तो नाना जी आये हैं, नाना जी आये हैं....।"
माता पिता ने दरवाजे की तरफ देखा। सोचा, 'कहीं हम सपना तो नहीं देख रहे !' बेटी हर्ष से पुलकित हो उठी, 'अहा !पन्द्रह वर्ष के बाद आज पिता जी आये हैं।' प्रेम से गला रूँध गया, कुछ बोल न सकी। साधक ने फल व मिठाइयाँ टेबल पर रखीं और दोनों हाथ जोड़कर दामाद को कहाः "बेटा ! सारी भूल मुझसे हुई है, मुझे क्षमा करो।"
"क्षमा" शब्द निकलते ही उनके हृदय का प्रेम अश्रु बनकर बहने लगा। दामाद उनके चरणों में गिर गये और अपनी भूल के लिए रो-रोकर क्षमा याचना करने लगे। ससुरजी के प्रेमाश्रु दामाद की पीठ पर और दामाद के पश्चाताप व प्रेममिश्रित अश्रु ससुरजी के चरणों में गिरने लगे। पिता पुत्री से और पुत्री अपने वृद्ध पिता से क्षमा माँगने लगी। क्षमा व प्रेम का अथाह सागर फूट पड़ा। सब शांत, चुप ! सबकी आँखों सके अविरल अश्रुधारा बहने लगी। दामाद उठे और रूपये लाकर ससुर जी के सामने रख दिये। ससुरजी कहने लगेः "बेटा ! आज मैं इन कौड़ियों को लेने के लिए नहीं आया हूँ। मैं अपनी भूल मिटाने, अपनी साधना को सजीव बनाने और द्वेष का नाश करके प्रेम की गंगा बहाने आया हूँ।
मेरा आना सफल हो गया, मेरा दुःख मिट गया। अब मुझे आनंद का एहसास हो रहा है।"
दामाद ने कहाः "पिताजी ! जब तक आप ये रूपये नहीं लेंगे तब तक मेरे हृदय की तपन नहीं मिटेगी। कृपा करके आप ये रूपये ले लें।"
साधक ने दामाद से रूपये लिये और अपनी इच्छानुसार बेटी व नातियों में बाँट दिये। सब कार में बैठे, घर पहुँचे। पन्द्रह वर्ष बाद उस अर्धरात्रि में जब माँ-बेटी, भाई-बहन, ननद-भाभी व बालकों का मिलन हुआ तो ऐसा लग रहा था कि मानो साक्षात् प्रेम ही शरीर धारण किये वहाँ पहुँच गया हो। सारा परिवार प्रेम के अथाह सागर में मस्त हो रहा था। क्षमा माँगने के बाद उस साधक के दुःख, चिंता, तनाव, भय, निराशारूपी मानसिक रोग जड़ से ही मिट गये और साधना सजीव हो उठे।

कृपया हमारी NGO में DONATE करने के लिए हमारी वेबसाइट पर जाकर अपने बैंक अकाउंट से अकाउंट ऐड करके दान कर सकते है Visit this page and donate us Or Donate us directly in our bank account Name: Earthcare Foundation Account Number: 917010049308398 IFS CODE: UTIB0000712 www.earthcarengo.org

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Wednesday, August 9, 2017

Monday, July 10, 2017

मैं कुछ पल साथ ना दूं,,,मत घबराना तुम,,

मैं कुछ पल साथ ना दूं,,,मत घबराना तुम,,
जिंदगी भी है खेल,,,इसको हंसकर जी लेना तुम,,
हमारा भी तेरे संग ,,,साथ है कब तलक ना पता,,
लेकिन कसम हैं मेरी,,,मेरी याद में आंसू ना बहाना तुम,,
जिंदगी की डोर नाज़ुक है,,,पर मजबूत प्रेम का है बन्धन,,
सफर चाहे जब हो खत्म,,सात जन्मों में मिल जाना तुम,,
मैं कुछ पल साथ ना दूं,,,मत घबराना तुम,,

Tuesday, July 4, 2017

वो रिश्ते अर्थहीन होते हैं ,,,जिनमे अपनेपन का अभाव हो Nirmal Earthcarefoundation Ngo

वो रिश्ते अर्थहीन होते हैं ,,,जिनमे अपनेपन का अभाव हो
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Sunday, July 2, 2017

दर दर भटका मंदिर,मस्जिद ना अल्लाह मिला ना राम अंतरात्मा से फिर आवाज आई मैं तो तुझमे ही हूँ ऐ इंसान। Nirmal Earthcarefoundation Ngo

दर दर भटका मंदिर,मस्जिद
ना अल्लाह मिला ना राम
अंतरात्मा से फिर आवाज आई
मैं तो तुझमे ही हूँ ऐ इंसान।
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Friday, June 30, 2017

क्यूँ ना गुड्डे गुड़ियों की कहानी सुन लो तुम मुझसे,, फिर वही बच्चों की तरह कोई जिद कर लो तुम मुझसे,,,

क्यूँ ना गुड्डे गुड़ियों की कहानी सुन लो तुम मुझसे,,
फिर वही बच्चों की तरह कोई जिद कर लो तुम मुझसे,,,
वही अंजान सा लम्हा,,,जो बीते कल्पना से परे,,
हाँ पलको के झुरमुट मे,,, तुम मेरी आशाओं में,,,
सूर्य सी रश्मियों की तरहा,,, समाहित हो जाओ मन मे,,,
क्यूँ ना गुड्डे गुड़ियों की कहानी सुन लो तुम मुझसे,,
फिर वही बच्चों की तरह कोई जिद कर लो तुम मुझसे,,,

जैसे जैसे शाम ढलती थी,,,
मैं अपनी छत के कोने से,,,
बस यही देखता रहता ,,,,
कब तुम आओगे मिलने,,,
झलक इक पाने की खातिर,,,
चाँद भी जगता रहता था,,,
जाने कितनी बाते होती थी,,,
तकिये के सिरहाने पे तुम थी,,,
क्या थी कोई वास्तविकता,,,
या थी तुम म्रग मरीचिका,,,
मुझको तड़पाती रहती थी,,,
मुझको तरसाती रहती थी,,,
खोकर सपनो के आंगन में ,,,
मैं गुड्डा तुम गुड़िया बन जाती थी,,,
उसी अंदाज में इक बार,,,,i love you,,,, कहदो तुम मुझसे
क्यूँ ना गुड्डे गुड़ियों की कहानी सुन लो तुम मुझसे,,
फिर वही बच्चों की तरह कोई जिद कर लो तुम मुझसे,,,
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

#LUVUHMESHAMYLUV

इक चोला तेरे नाम का, मैंने पहन लिया,, हर मजहब को भूल कर,मैंने तुझको ही याद किया। कभी तू मेरे रिश्तो में संग था,, कभी तो दोस्तों के रूप में, कभी बिन मांगी दुवा की तरह तू मुझको मिल गया,,, #iamonlyindian

इक चोला तेरे नाम का, मैंने पहन लिया,,
हर मजहब को भूल कर,मैंने तुझको ही याद किया।
कभी तू मेरे रिश्तो में संग था,,
कभी तो दोस्तों के रूप में,
कभी बिन मांगी दुवा की तरह
तू मुझको मिल गया,,,

#iamonlyindian

इनका बचपन कहाँ है,,, ना इनके लिए मोदीजी है ना कोई योगी जी है नाही कोई नेता

इनका बचपन कहाँ है,,,
ना इनके लिए मोदीजी है
ना कोई योगी जी है
नाही कोई नेता
ना हम
ना तुम
शर्म आती है हमे अपने आप पर जब ऐसे लाखों बचपनो को बिखरते देखते है
नम हो जाती है ये आँखें जब इनके सपनो को टूटते देखते है
मर जाती है मेरी सब इच्छाएं,,,जब कुछ रोटी के टुकड़ो के लिए इनको दर डर भटकते देखते है
ऐसे में नाही कोई संत मिलता है
नाही कोई मौलवी जो इनका भी निर्णय करे की इनकी क्या जात है क्या इनका धर्म है
क्योकि ये गरीब है
धर्म के ठेकेदारों को इनसे कोई फायदा नही

#ifeelshameful

हममे ही अल्लाह बसे,हममे ही है राम। बस इक सोच का फर्क है, मत मनुष्यता को करो बदनाम। Nirmal Earthcarefoundation Ngo

हममे ही अल्लाह बसे,हममे ही है राम।
बस इक सोच का फर्क है,
मत मनुष्यता को करो बदनाम।
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प्रेम का धागा पहन कर,,,,जात पात जाये भूल। हर आंगन में खुशियां आये,,मुस्काये हर फूल।। Nirmal Earthcarefoundation Ngo

प्रेम का धागा पहन कर,,,,जात पात जाये भूल।
हर आंगन में खुशियां आये,,मुस्काये हर फूल।।
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Wednesday, June 28, 2017

मोदी औ ट्रम्प मिलन से,घबराया है चीन। आतंक आकाओं के बैन से,पाक की बज गयी बीन। Nirmal Earthcarefoundation Ngo

मोदी औ ट्रम्प मिलन से,घबराया है चीन।
आतंक आकाओं के बैन से,पाक की बज गयी बीन।
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इतनी ईर्ष्या क्यों मन में,बन जा तू इंसान। लोभ मोह को छोड़कर,कर मानव कल्याण।। सियावर राम जय जय राम। Nirmal Earthcarefoundation Ngo

इतनी ईर्ष्या क्यों मन में,बन जा तू इंसान।
लोभ मोह को छोड़कर,कर मानव कल्याण।।
सियावर राम जय जय राम।
Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Monday, June 19, 2017

इसलिए सुबह थोड़ी देर ईश्वर से बात कीजिये ईश्वर में लीन होकर देखिये,,,, हे ईश्वर।।।।।।

ईश्वर की उपासना हमे एक ऐसे संसार से परिचित कराती है जहाँ सबकुछ कल्पना से परे महसूस होता है,,,मात्र आँखे बंद करने से और उस निराकार परमेश्वर में लीन होने मात्र से जैसे ये संकुचित और असंतुष्ट जीवन किसी केंद्र पर जाकर ठहर जाता है और वह शून्य ही जो हमारे मन में केंद्र बनकर उभरता है वो सारे दैनिक सम्मोहन को नष्ट कर एक ऐसे आनंद की अनुभूति कराता है जिसका अनुभव हम भौतिक जीवन में रहकर कभी भी अनुभव नही कर सकते हैं,,,,,
इसके साथ ही हमारे शरीर के साथ साथ हमारे जीवन की नकारात्मक ऊर्जा का क्षय,,,और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होने लगता है,,ये हमारे विस्वास को दृढता प्रदान करने के साथ ,,,जीवन में आने वाली हर कठिनाई से लड़ने के लिए मुस्कराता हुआ साहस प्रदान करता है,,,जिससे कैसी भी परिस्थिति आने पर मन संयमित रहता है ,,,अथवा विचलित नही होता,,,

इसलिए सुबह थोड़ी देर ईश्वर से बात कीजिये
ईश्वर में लीन होकर देखिये,,,,
हे ईश्वर।।।।।।

Nirmal Earthcarefoundation Ngo

Saturday, June 17, 2017

*प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह*

।। संस्कार ।।:--

*प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह*

1. प्रात: कर-दर्शनम्:--

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

2. पृथ्वी क्षमा प्रार्थना:--

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥

3. त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण:--

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

4. स्नान मन्त्र:--

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

5. सूर्यनमस्कार:--

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥

ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

6. संध्या दीप दर्शन:--

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

7. गणपति स्तोत्र:--

गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:। द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥ विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:। द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥ विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्। विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय। लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥ नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय। गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥

8. आदिशक्ति वंदना:--

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

9. शिव स्तुति:--

कर्पूर गौरम करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारं। सदा वसंतं हृदयार विन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि॥

10. विष्णु स्तुति:--

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

11. श्री कृष्ण स्तुति:--

कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम। नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥ सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि। गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥

12. श्रीराम वंदना:--

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

13. श्रीरामाष्टक:--

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा। गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥ हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते। बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥

14. एक श्लोकी रामायण:--

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥

15. सरस्वती वंदना:--

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥ या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥

16. हनुमान वंदना:--

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्। दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥

17. स्वस्ति-वाचन:--

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

18. शांति पाठ:--

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

Wednesday, June 14, 2017

ऐसे मौसम में दिल की सुननी ही चाहिए,,, जब टिप टिप करती बूंदे धरती का आलिंगन कर रही हो,,,और तपती हुई धरा के ताप से उठती हुई सोंधी सोंधी खुशबू हवा के आवेग के साथ उड़ती हुई चारों दिशाओं को अपनी खुशबू से उद्वेलित कर रही हो,,,फिर कैसे इस व्यग्र मन को रोके,,,सच में ये टिप टिप करती बूंदे धरती पर जैसे जैसे गिर कर छम छम सा गीत गुनगुना रही है और इनसे उत्पन्न बौछारे नृत्य करती हुई जैसे जैसे मुझे स्पर्श कर रही है वैसे वैसे मेरे ह्रदय का ताप कुछ कुछ तो कम हो ही रहा है बस सारी बंदिशे तोड़कर कर हम भी एक हो जाए इन नन्ही बूंदों के साथ,,,ये अनुभूति सत्य ही लाखों कृत्रिम सुखों से बढ़कर है हे ईश्वर।।।।। Nirmal earthcarefoundation ngo

ऐसे मौसम में दिल की सुननी ही चाहिए,,,
जब टिप टिप करती बूंदे धरती का आलिंगन कर रही हो,,,और तपती हुई धरा के ताप से उठती हुई सोंधी सोंधी खुशबू हवा के आवेग के साथ उड़ती हुई चारों दिशाओं को अपनी खुशबू से उद्वेलित कर रही हो,,,फिर कैसे इस व्यग्र मन को रोके,,,सच में ये टिप टिप करती बूंदे धरती पर जैसे जैसे गिर कर छम छम सा गीत गुनगुना रही है और इनसे उत्पन्न बौछारे नृत्य करती हुई जैसे जैसे मुझे स्पर्श कर रही है वैसे वैसे मेरे ह्रदय का ताप कुछ कुछ तो कम हो ही रहा है
बस सारी बंदिशे तोड़कर कर हम भी एक हो जाए इन नन्ही बूंदों के साथ,,,ये अनुभूति सत्य ही लाखों कृत्रिम सुखों से बढ़कर है

हे ईश्वर।।।।।

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Monday, June 12, 2017

हज़ारों मील दूर कर दिया जमाने ने हमे फिर भी हम तुम्हारे दिल में है,,और तुम हमारे,, Nirmal Earthcarefoundation Ngo

हज़ारों मील दूर कर दिया जमाने ने हमे फिर भी हम तुम्हारे दिल में है,,और तुम हमारे,,
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कोई तो है इस दिल के दरमियाँ, नही तो हर आवाज में एक ही आवाज क्यूँ सुनाई देती #feelingaboutlove

कोई तो है इस दिल के दरमियाँ,
नही तो हर आवाज में एक ही आवाज क्यूँ सुनाई देती
#feelingaboutlove

Saturday, June 3, 2017

कई वर्षों पुरानी इक कहानी याद आती है,,,, जिसमे तुम राधिका और,,,मैं था तेरा,,, बाँसुरिवाला,,,

कई वर्षों पुरानी इक कहानी याद आती है,,,,
जिसमे तुम राधिका और,,,मैं था तेरा,,,
बाँसुरिवाला,,,
हाँ दिल में हर बार ताज़ा हो जाती है,,,
जब तेरी प्यारी सी सूरत,,,
मैं थी इक गोपिका तेरी,,,
तू था मेरा साँवरा मतवाला,,,,
हम अनभिज्ञ थे,,,उससे
जिसे अब प्रेम कहते हैं,,,
तू रीझे और मैं हर बार ही तुझको मनाता था,,,
मनाने से जो ना माने,,,,तो मैं बंसी बजाता था,,
फिर वो मुरझाई सी कलियाँ,, भी जब झूम जाती थी,,,
घटाएं रिम झिम रिमझिम से कोई वो गीत गाती थी,,,
प्यार से तुमको मैं श्री राम,,,मैं तेरी सीते बन जाती थी,,,
हाँ तेरे ही पीताम्बर से मेरी चुनरी लहराती थी,,,
वही मैं राधिका और तुम मेरे घनश्याम बन जाओ,,,
वही मैं राधिका और तुम मेरे घनश्याम बन जाओ,,,

कई वर्षों पुरानी इक कहानी याद आती है,,,,
जिसमे तुम राधिका और,,,मैं था तेरा,,,
बाँसुरिवाला,,,

Nirmalearthcarefoundation